मानसिक परेशानियों को खुलकर साझा कर सकेंगे विद्यार्थी, परामर्श समिति और मनोविज्ञान विभाग करेंगे समाधान का प्रयास
नरेंद्रनगर। विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर धर्मानंद उनियाल राजकीय महाविद्यालय, नरेंद्रनगर में मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने और विद्यार्थियों की समस्याओं के समाधान के उद्देश्य से विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। महाविद्यालय की मानसिक स्वास्थ्य परामर्श समिति एवं मनोविज्ञान विभाग की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में छात्रों को मानसिक स्वास्थ्य के महत्व, मानसिक परेशानियों को साझा करने और समय पर परामर्श लेने के प्रति जागरूक किया गया।
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों की समस्याओं को सुनने और उनके समाधान की दिशा में एक अभिनव पहल करते हुए ‘अभिव्यक्ति पेटिका’ का शुभारंभ किया गया। इसके माध्यम से छात्र-छात्राएं अपनी मानसिक स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों को लिखित रूप में मोबाइल नंबर के साथ साझा कर सकेंगे। प्राप्त समस्याओं के निराकरण के लिए मानसिक स्वास्थ्य परामर्श समिति और मनोविज्ञान विभाग की ओर से आवश्यक सहयोग एवं मार्गदर्शन देने का प्रयास किया जाएगा। इस पहल का उद्देश्य विद्यार्थियों को अपनी बात कहने के लिए सहज और सहयोगात्मक मंच उपलब्ध कराना है।
मानसिक रूप से स्वस्थ रहना विद्यार्थियों के लिए जरूरी : प्राचार्य
कार्यक्रम में महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. विजय सिंह नेगी ने कहा कि वर्तमान समय में अवसाद, चिंता और पैनिक अटैक जैसी मानसिक स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियां बढ़ रही हैं। ऐसे में मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान देना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थी मानसिक रूप से स्वस्थ और सशक्त होंगे तो वे अपनी पढ़ाई और जीवन की चुनौतियों का बेहतर तरीके से सामना कर सकेंगे। मानसिक स्वास्थ्य को नजरअंदाज करने के बजाय समय रहते उचित मार्गदर्शन और सहयोग लेना चाहिए।
अपनों से साझा करें मन की बात : डॉ. रंजीता जौहरी
बतौर विषय विशेषज्ञ डॉ. रंजीता जौहरी ने विद्यार्थियों को मानसिक स्वास्थ्य के महत्व के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि किसी भी प्रकार की मानसिक परेशानी होने पर छात्र-छात्राओं को अपने माता-पिता, शिक्षकों और मित्रों से खुलकर बात करनी चाहिए। समस्याओं को मन में दबाकर रखने के बजाय उन्हें साझा करना जरूरी है। उन्होंने यह भी बताया कि कई परिस्थितियों में मनोचिकित्सीय परामर्श मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से निपटने में सहायक साबित होता है।
सोशल मीडिया का सीमित उपयोग भी जरूरी
डॉ. सृचना सचदेवा ने मानसिक स्वास्थ्य को जीवन कौशल से जोड़ते हुए कहा कि तकनीकी युग में सोशल मीडिया और इंटरनेट का अत्यधिक उपयोग भी मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकता है। उन्होंने विद्यार्थियों को डिजिटल माध्यमों के उपयोग की सीमा निर्धारित करने और अपने दैनिक जीवन में संतुलन बनाए रखने की सलाह दी।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. सोनी तिलारा ने किया। इस अवसर पर डॉ. सुधा रानी, डॉ. अंकिता रावत, डॉ. बीपी पोखरियाल, डॉ. जितेंद्र नौटियाल, मनोज भूषण, सोनिया, वर्षा, शिशुपाल, विशाल त्यागी सहित महाविद्यालय के कर्मचारी और छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
महाविद्यालय में शुरू की गई ‘अभिव्यक्ति पेटिका’ को विद्यार्थियों की मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को समझने और उन्हें उचित मार्गदर्शन उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है।