शैक्षणिक, खेलकूद और सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थी पदक व ट्रॉफी से सम्मानित
मसूरी। गुरु नानक फिफ्थ सेंटेनरी स्कूल, मसूरी में 57वां स्थापना दिवस हर्षोल्लास और भव्यता के साथ मनाया गया। इस अवसर पर विद्यालय परिसर रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से गुलजार रहा। विद्यार्थियों ने नृत्य, नाटक, लोक संगीत और गायन के माध्यम से अपनी प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन कर उपस्थित अतिथियों और अभिभावकों का मन मोह लिया। समारोह में वर्षभर शैक्षणिक, खेलकूद और अन्य गतिविधियों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले छात्र-छात्राओं को पदक एवं ट्रॉफी प्रदान कर सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी के निदेशक डॉ. बी. राजेंद्र रहे। विद्यालय पहुंचने पर एनसीसी कैडेट्स ने उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर देकर सम्मानित किया। समारोह का शुभारंभ स्वागत नृत्य और शिव वंदना के साथ हुआ। इसके बाद विद्यार्थियों की विविध प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम को यादगार बना दिया।
नाटकों और लोक प्रस्तुतियों ने बिखेरे संस्कृति के रंग
समारोह में विद्यार्थियों ने अपनी अभिनय क्षमता और रचनात्मकता का प्रभावशाली प्रदर्शन किया। कनिष्ठ वर्ग के अंग्रेजी नाटक ‘मी टू वी’ के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण और पृथ्वी को बचाने के लिए सामूहिक प्रयासों का संदेश दिया गया। वहीं, अंग्रेजी नाटक ‘डियर डिपार्टेड’ ने हास्य-व्यंग्य के जरिए बदलते पारिवारिक रिश्तों और मानवीय संवेदनाओं पर कटाक्ष किया।
उत्तराखंड की समृद्ध लोक संस्कृति को दर्शाती गढ़वाली प्रस्तुति ‘चैता की चैतवाली’ ने दर्शकों को लोक परंपराओं से रूबरू कराया। हिंदी नाटक ‘यमराज के वरदान’ ने भी दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया। इसके साथ ही पंजाबी लोक संस्कृति की पहचान गिद्दा और जोश से भरपूर भांगड़ा की प्रस्तुतियों ने समारोह में उत्साह का रंग भर दिया। वाद्य संगीत और गायन की प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम की भव्यता को और बढ़ाया।
मेधावी विद्यार्थियों को पदक और ट्रॉफी देकर किया सम्मानित
विद्यालय के प्रधानाचार्य अनिल तिवारी ने वार्षिक रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए विद्यालय की शैक्षणिक उपलब्धियों और वर्षभर की गतिविधियों का विवरण दिया। उन्होंने आईसीएसई एवं आईएससी परीक्षा परिणाम-2026, शैक्षणिक प्रगति, खेलकूद प्रतियोगिताओं, नगर कीर्तन तथा अंतर-सदनीय एवं अंतर-विद्यालयी प्रतियोगिताओं में विद्यार्थियों के प्रदर्शन की जानकारी दी।
मुख्य अतिथि डॉ. बी. राजेंद्र ने विभिन्न शैक्षणिक और खेलकूद प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को पदक एवं ट्रॉफी प्रदान कर सम्मानित किया। उन्होंने विद्यार्थियों की मेहनत, प्रतिभा और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों की सराहना करते हुए कहा कि विद्यालय केवल शिक्षा प्राप्त करने का स्थान नहीं, बल्कि व्यक्तित्व निर्माण की ऐसी भूमि है, जहां भविष्य के जिम्मेदार नागरिक तैयार होते हैं।
उन्होंने विद्यार्थियों को जीवन में बड़े सपने देखने और उन्हें साकार करने के लिए निरंतर मेहनत करने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि समर्पण, अनुशासन और लगन के साथ आगे बढ़कर विद्यार्थी अपने लक्ष्यों को प्राप्त कर सकते हैं।
विद्यार्थियों, शिक्षकों और अभिभावकों की सहभागिता अहम
जीएनएफसी समिति के सचिव सरदार महेंद्र पाल सिंह ने अपने संबोधन में विद्यालय की प्रगति और भविष्य की योजनाओं की जानकारी साझा की। उन्होंने कहा कि विद्यालय के शैक्षणिक और सह-पाठ्यक्रम विकास में विद्यार्थियों, शिक्षकों तथा अभिभावकों की सहभागिता महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
समारोह में लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी के प्रोफेसर डॉ. बगाड़ी गौतम, डिप्टी डायरेक्टर अस्वाथी सेलुराज, सरदारनी जसवीन कौर, असीस कौर, पूर्व नगरपालिका अध्यक्ष ओपी उनियाल, उत्तराखंड क्रिकेट एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष जोत सिंह गुनसोला, सभासद जसबीर कौर, रोटरी क्लब अध्यक्ष अश्वनी मित्तल, शिवम गुप्ता, राजन विरमानी, सरदार इंद्रजीत सिंह, सरदार त्रिलोचन सिंह, सतनाम सिंह, प्रशासनिक अधिकारी सुनील बख्शी और मुख्य अध्यापक कुलदीप सिंह त्यागी सहित विद्यालय के शिक्षक, शिक्षणेत्तर कर्मचारी, पूर्व छात्र-छात्राएं, अभिभावक एवं अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
विद्यालय का 57वां स्थापना दिवस विद्यार्थियों की प्रतिभा, शैक्षणिक उपलब्धियों और सांस्कृतिक विविधता का उत्सव बना। समारोह ने शिक्षा के साथ-साथ संस्कार, अनुशासन, सामाजिक जिम्मेदारी और भारतीय लोक संस्कृति के संरक्षण के महत्व को भी रेखांकित किया।