जुनून ऐसा कि इतिहास बन गया: पीयूष गोयल ने साहित्य को दी नई पहचान

दर्पण में पढ़ी जाने वाली 19 पुस्तकें लिखकर पीयूष गोयल ने रचा इतिहास, सुई, कील और मेंहदी से भी लिखीं अनोखी कृतियां

विशेष संवाददाता

दुनिया में प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है, लेकिन कुछ लोग अपनी अद्भुत कला और लगन से इतिहास रच देते हैं। ऐसे ही एक अनोखे कलाकार और लेखक हैं पीयूष गोयल, जिन्होंने दर्पण छवि (Mirror Image) शैली में 19 पुस्तकें लिखकर एक अनूठी मिसाल कायम की है। उनकी लिखी पुस्तकों को पढ़ने के लिए पाठकों को दर्पण का सहारा लेना पड़ता है, क्योंकि सभी अक्षर उल्टे लिखे गए हैं और शीशे में सीधे दिखाई देते हैं।

57 वर्षीय पीयूष गोयल ने अपने जीवन के कठिन दौर को अपनी सबसे बड़ी ताकत में बदल दिया। वर्ष 2000 में एक गंभीर सड़क दुर्घटना के बाद लगभग नौ महीने तक संघर्ष करने के दौरान उन्होंने श्रीमद्भगवद्गीता का गहन अध्ययन किया। स्वस्थ होने के बाद उन्होंने कुछ अलग करने का संकल्प लिया और मिरर इमेज लेखन की अनूठी कला विकसित कर ली।

उल्टे अक्षरों में लिखी श्रीमद्भगवद्गीता

पीयूष गोयल ने दुनिया की पहली मिरर इमेज शैली में लिखी गई श्रीमद्भगवद्गीता तैयार की। इस पुस्तक को पढ़ने के लिए दर्पण की आवश्यकता होती है। जैसे ही पुस्तक को शीशे के सामने रखा जाता है, सभी अक्षर सीधे दिखाई देने लगते हैं।

सुई से लिखी विश्व की अनोखी ‘मधुशाला’

जब लोगों ने कहा कि उनकी पुस्तकों को पढ़ने के लिए हमेशा शीशे की जरूरत पड़ती है, तो पीयूष गोयल ने एक और अनोखा प्रयोग किया। उन्होंने प्रसिद्ध कवि हरिवंश राय बच्चन की कालजयी कृति ‘मधुशाला’ को सुई से मिरर इमेज शैली में लिखा। इस कार्य को पूरा करने में उन्हें करीब ढाई महीने लगे। दावा किया जाता है कि यह दुनिया की पहली ऐसी पुस्तक है जो सुई और मिरर इमेज दोनों तकनीकों से लिखी गई है।

मेंहदी से लिख डाली ‘गीतांजलि’

साहित्य के नोबेल पुरस्कार विजेता रवीन्द्रनाथ टैगोर की प्रसिद्ध कृति ‘गीतांजलि’ को पीयूष गोयल ने मेंहदी के कोन से लिखा। उन्होंने मात्र 29 दिनों में गीतांजलि के सभी 103 अध्याय पूरे कर दिए। इस कार्य में 17 मेंहदी कोन और दो नोटबुक का उपयोग किया गया।

कील से लिखी ‘पीयूष वाणी’

अपनी रचनात्मकता को नई ऊंचाई देते हुए पीयूष गोयल ने अपनी पुस्तक ‘पीयूष वाणी’ को एल्युमिनियम शीट पर कील की सहायता से उकेरा। यह प्रयोग भी साहित्य और कला जगत में चर्चा का विषय बना।

कार्बन पेपर से रची ‘पंचतंत्र’

पीयूष गोयल ने कार्बन पेपर की मदद से आचार्य विष्णु शर्मा रचित ‘पंचतंत्र’ की सभी 41 कथाओं को अनोखी शैली में लिखा। इसमें पृष्ठ के एक तरफ शब्द मिरर इमेज में दिखाई देते हैं, जबकि दूसरी तरफ सीधे पढ़े जा सकते हैं।

कई धार्मिक और साहित्यिक ग्रंथों का अनूठा लेखन

पीयूष गोयल अब तक श्रीमद्भगवद्गीता, दुर्गा सप्तशती, साईं सत्चरित्र, सुंदरकांड, चालीसा संग्रह, मधुशाला, गीतांजलि, पंचतंत्र और अपनी पुस्तक ‘पीयूष वाणी’ सहित अनेक ग्रंथों को विभिन्न अनोखी तकनीकों से लिख चुके हैं।

विद्यार्थियों को दे रहे निःशुल्क प्रेरणा

डिप्लोमा इन मैकेनिकल इंजीनियरिंग करने वाले पीयूष गोयल वर्तमान में विद्यार्थियों को निःशुल्क मोटिवेशनल मार्गदर्शन भी प्रदान कर रहे हैं। उनका मानना है कि कठिन परिस्थितियां ही व्यक्ति को असाधारण बनने का अवसर देती हैं।

“नर हो, न निराश करो मन को,
कुछ काम करो, कुछ काम करो,
जग में रहकर कुछ नाम करो…”

इन प्रेरणादायक पंक्तियों को जीवन का मंत्र मानने वाले पीयूष गोयल आज अपनी अनूठी प्रतिभा से साहित्य और कला जगत में एक अलग पहचान बना चुके हैं। उनकी रचनाएं इस बात का प्रमाण हैं कि जुनून, धैर्य और समर्पण से असंभव को भी संभव बनाया जा सकता है।

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