शिव शक्ति मंदिर महड़ में नौ दिवसीय धार्मिक अनुष्ठान शुरू, भक्तिमय हुआ दशज्युला क्षेत्र - Seva Bharat Times

शिव शक्ति मंदिर महड़ में नौ दिवसीय धार्मिक अनुष्ठान शुरू, भक्तिमय हुआ दशज्युला क्षेत्र

प्रवासी और धियाणियों की घर वापसी से गांवों में लौटी रौनक, मां चंडिका के मायके पक्ष आगर के ग्रामीणों ने की पंच पूजा

रुद्रप्रयाग। विकासखंड अगस्त्यमुनि के दशज्युला क्षेत्र स्थित प्रसिद्ध शिव शक्ति मंदिर महड़ में शारदीय नवरात्र के पावन अवसर पर नौ दिवसीय धार्मिक अनुष्ठान का विधिवत शुभारंभ हो गया है। पूजा-अर्चना और पारंपरिक धार्मिक विधि-विधानों के बीच पूरा क्षेत्र भक्तिरस में सराबोर है। इस धार्मिक आयोजन ने न केवल श्रद्धालुओं में उत्साह बढ़ाया है, बल्कि प्रवासियों और धियाणियों की घर वापसी से गांवों में भी रौनक लौट आई है।

पंच पूजा के साथ हुआ धार्मिक अनुष्ठान का आगाज

नौ दिवसीय अनुष्ठान के प्रथम दिन मां चंडिका के मायके पक्ष माने जाने वाले आगर गांव के ग्रामीणों ने पारंपरिक पंच पूजा में भाग लिया। स्थानीय रीति-रिवाजों के अनुसार संपन्न हुई इस पूजा को धार्मिक आयोजन का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की आस्था और पारंपरिक धार्मिक गतिविधियों के बीच उत्सव जैसा माहौल बना हुआ है।

धार्मिक आयोजन को लेकर मंदिर समिति और ग्रामीणों ने पहले से ही तैयारियां पूरी कर ली थीं। आगामी नौ दिनों तक मंदिर में विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान और पूजा-अर्चना की जाएगी। इससे दशज्युला क्षेत्र में भक्ति, श्रद्धा और सांस्कृतिक उल्लास का माहौल बना रहने की उम्मीद है।

धियाणियों और प्रवासियों की वापसी से गांवों में बढ़ी चहल-पहल

इस धार्मिक आयोजन का ग्रामीणों को बेसब्री से इंतजार रहता है। अनुष्ठान में शामिल होने के लिए दूर-दराज के क्षेत्रों में रहने वाले प्रवासियों और विवाहित बेटियों यानी धियाणियों की अपने पैतृक गांवों में वापसी शुरू हो गई है। लंबे समय बाद अपनों से मिलने और पारंपरिक धार्मिक आयोजनों में भाग लेने का अवसर मिलने से ग्रामीणों में खासा उत्साह है।

धियाणियों और प्रवासियों की मौजूदगी से गांवों में चहल-पहल बढ़ गई है। यह आयोजन धार्मिक आस्था के साथ-साथ परिवारों को जोड़ने, लोक संस्कृति को जीवंत रखने और नई पीढ़ी को अपनी परंपराओं से परिचित कराने का भी माध्यम बन रहा है।

आदि गुरु शंकराचार्य से जुड़ी है मंदिर की मान्यता

दशज्युला क्षेत्र के शिव शक्ति मंदिर महड़ को लेकर स्थानीय लोगों में गहरी आस्था है। प्रचलित मान्यता के अनुसार, मंदिर का निर्माण आदि गुरु शंकराचार्य ने करवाया था। मंदिर से जुड़ी विशिष्ट धार्मिक परंपराएं इसे क्षेत्र के श्रद्धालुओं के लिए विशेष महत्व का आस्था केंद्र बनाती हैं।

स्थानीय मान्यता के मुताबिक, धार्मिक आयोजनों के दौरान भगवान शिव पार्श्व मंदिर में स्थित एक छोटी-सी खिड़की से बाहर आते हैं। मंदिर की इस अनूठी परंपरा को लेकर श्रद्धालुओं में विशेष श्रद्धा है।

शारदीय नवरात्र के अवसर पर शुरू हुआ यह नौ दिवसीय धार्मिक अनुष्ठान दशज्युला क्षेत्र की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत को नई ऊर्जा दे रहा है। एक ओर मंदिर में पूजा-अर्चना के जरिए आस्था का माहौल बना हुआ है, वहीं दूसरी ओर धियाणियों और प्रवासियों की घर वापसी ने गांवों में फिर से रौनक बिखेर दी है।

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