खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 की क्रय नीति को कैबिनेट की मंजूरी, प्रदेश में खुलेंगे 455 क्रय केंद्र; किसानों को 48 घंटे में भुगतान का लक्ष्य
लखनऊ। उत्तर प्रदेश के किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने और मोटे अनाज की खेती को बढ़ावा देने के लिए योगी सरकार ने खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 की सरकारी खरीद नीति तय कर दी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में मक्का, बाजरा और ज्वार की सरकारी खरीद के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। इसके तहत प्रदेश में कुल 2.85 लाख मीट्रिक टन मोटे अनाज की खरीद का लक्ष्य प्रस्तावित किया गया है। इसके लिए प्रदेशभर में 455 क्रय केंद्र स्थापित करने की तैयारी है।
नई नीति के तहत बाजरे और हाइब्रिड ज्वार के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में भी बढ़ोतरी की गई है। सरकार का उद्देश्य किसानों को उनकी उपज का लाभकारी मूल्य उपलब्ध कराना, सरकारी खरीद प्रक्रिया को पारदर्शी बनाना और भुगतान सीधे किसानों के बैंक खातों में पहुंचाना है।
बाजरे के समर्थन मूल्य में ₹125 की बढ़ोतरी
सरकार की नई क्रय नीति के अनुसार, बाजरे का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2,775 रुपये से बढ़ाकर 2,900 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया गया है। यानी किसानों को पिछले निर्धारित समर्थन मूल्य के मुकाबले 125 रुपये प्रति क्विंटल अधिक मिलेंगे।
वहीं, मक्का का समर्थन मूल्य 2,410 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है। हाइब्रिड ज्वार का एमएसपी 3,699 रुपये से बढ़ाकर 4,023 रुपये प्रति क्विंटल किया गया है, जिसमें 324 रुपये की वृद्धि हुई है। ज्वार मालदांडी का समर्थन मूल्य 4,073 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है।
2.20 लाख मीट्रिक टन बाजरे की खरीद का लक्ष्य
प्रदेश में मोटे अनाज की सरकारी खरीद के लिए निर्धारित प्रस्तावित लक्ष्य में बाजरे की सबसे बड़ी हिस्सेदारी होगी। फसलवार खरीद का लक्ष्य इस प्रकार है:
- बाजरा: 2.20 लाख मीट्रिक टन
- ज्वार: 50 हजार मीट्रिक टन
- मक्का: 15 हजार मीट्रिक टन
इस प्रकार तीनों फसलों की कुल 2.85 लाख मीट्रिक टन खरीद का कार्यकारी लक्ष्य रखा गया है।
प्रदेश में खुलेंगे 455 सरकारी क्रय केंद्र
किसानों की सुविधा और फसलों की आवक को ध्यान में रखते हुए सरकार ने 455 क्रय केंद्र खोलने का प्रस्ताव तैयार किया है। इनमें बाजरे के 300, ज्वार के 80 और मक्का के 75 क्रय केंद्र शामिल होंगे। केंद्र मुख्य रूप से उन क्षेत्रों में स्थापित किए जाएंगे, जहां संबंधित फसलों का उत्पादन और आवक अधिक होती है।
25 जिलों में होगी मक्का की सरकारी खरीद
मक्का की खरीद के लिए प्रदेश के 25 जिलों का चयन किया गया है। इनमें बुलंदशहर, बदायूं, हरदोई, उन्नाव, मैनपुरी, आगरा, फिरोजाबाद, अलीगढ़, एटा, कासगंज, हाथरस, कानपुर नगर, कानपुर देहात, इटावा, औरैया, फर्रुखाबाद, कन्नौज, बहराइच, गोंडा, देवरिया, बलिया, जौनपुर, मिर्जापुर, सोनभद्र और ललितपुर शामिल हैं।
33 जिलों में खरीदा जाएगा बाजरा
बाजरे की सरकारी खरीद के लिए 33 जिलों को निर्धारित किया गया है। इनमें बुलंदशहर, रामपुर, संभल, अमरोहा, बरेली, बदायूं, शाहजहांपुर, हरदोई, उन्नाव, आगरा, मथुरा, फिरोजाबाद, मैनपुरी, अलीगढ़, एटा, कासगंज, हाथरस, कानपुर नगर, कानपुर देहात, इटावा, फर्रुखाबाद, औरैया, कन्नौज, बलिया, जौनपुर, गाजीपुर, मिर्जापुर, प्रयागराज, कौशांबी, फतेहपुर, जालौन, चित्रकूट और हमीरपुर शामिल हैं।
13 जिलों में होगी ज्वार की खरीद
ज्वार की सरकारी खरीद उन्नाव, हरदोई, फिरोजाबाद, कानपुर नगर, कानपुर देहात, फतेहपुर, मिर्जापुर, झांसी, जालौन, बांदा, हमीरपुर, महोबा और चित्रकूट में की जाएगी।
सरकारी खरीद के लिए ऑनलाइन पंजीकरण जरूरी
सरकारी क्रय केंद्रों पर अपनी उपज बेचने के इच्छुक किसानों को खाद्य एवं रसद विभाग की आधिकारिक वेबसाइट www.fcs.up.gov.in पर ऑनलाइन पंजीकरण कराना होगा। खरीद के दौरान किसानों को कंप्यूटरीकृत सत्यापित खतौनी, फोटोयुक्त पहचान पत्र और आधार कार्ड प्रस्तुत करना होगा।
क्रय केंद्रों पर ई-पॉप मशीन के माध्यम से किसानों का बायोमेट्रिक सत्यापन किया जाएगा। पूरी खरीद प्रक्रिया राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (एनआईसी) द्वारा विकसित सॉफ्टवेयर के माध्यम से ऑनलाइन संचालित होगी, जिससे खरीद व्यवस्था में पारदर्शिता और निगरानी सुनिश्चित की जा सके।
आधार से जुड़े बैंक खाते में सीधे पहुंचेगा भुगतान
सरकार ने किसानों को उपज का भुगतान सीधे उनके बैंक खातों में करने की व्यवस्था की है। इसके लिए किसानों के आधार से जुड़े और एनपीसीआई से मैप किए गए बैंक खातों का सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन प्रणाली (पीएफएमएस) पोर्टल के माध्यम से सत्यापन किया जाएगा।
खाता सत्यापन के बाद यथासंभव 48 घंटे के भीतर भुगतान करने का लक्ष्य रखा गया है। इससे किसानों को भुगतान के लिए अनावश्यक इंतजार से राहत मिलने और सरकारी खरीद व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ने की उम्मीद है।
योगी सरकार की नई क्रय नीति से प्रदेश के मोटा अनाज उत्पादक किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य पर अपनी उपज बेचने का अवसर मिलेगा। साथ ही, बाजरे और ज्वार के बढ़े हुए समर्थन मूल्य से किसानों को बेहतर मूल्य मिलने की संभावना है।