राज्य आंदोलन के संघर्ष और बलिदान की गाथा अब पुस्तक में, सीएम धामी ने किया विमोच - Seva Bharat Times

राज्य आंदोलन के संघर्ष और बलिदान की गाथा अब पुस्तक में, सीएम धामी ने किया विमोच

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गुरुवार को आईआरडीटी सभागार, सर्वे चौक, देहरादून में उत्तराखण्ड राज्य आंदोलन के अग्रणी सेनानी एवं जननायक स्वर्गीय रणजीत सिंह वर्मा के जीवन पर आधारित पुस्तक ‘रणजीत सिंह वर्मा : उत्तराखण्ड राज्य आंदोलन की निर्णायक लड़ाई के एक जननायक’ का विमोचन किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने स्व. वर्मा को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उत्तराखण्ड राज्य निर्माण आंदोलन में उनके अतुलनीय योगदान को याद किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह पुस्तक महज एक जननायक की जीवनी नहीं, बल्कि उत्तराखण्ड राज्य आंदोलन के संघर्ष, समर्पण और जनभावनाओं का महत्वपूर्ण दस्तावेज है। पुस्तक के माध्यम से नई पीढ़ी को राज्य निर्माण के इतिहास और आंदोलनकारियों के त्याग एवं बलिदान को जानने का अवसर मिलेगा। उन्होंने इस महत्वपूर्ण कार्य के लिए वरिष्ठ साहित्यकार गंभीर सिंह पालनी एवं अजय वर्मा के प्रयासों की सराहना की।

आंदोलन को जन-जन तक पहुंचाने में निभाई अहम भूमिका

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड राज्य का निर्माण दशकों के संघर्ष और हजारों आंदोलनकारियों के त्याग एवं बलिदान का परिणाम है। स्व. रणजीत सिंह वर्मा ने पृथक उत्तराखण्ड राज्य की मांग को बुलंद करने, विभिन्न संगठनों को एकजुट करने और आंदोलन को व्यापक जनसमर्थन दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

उन्होंने बताया कि स्व. वर्मा ने उत्तराखण्ड संयुक्त संघर्ष समिति के देहरादून जनपद अध्यक्ष के रूप में आंदोलन को नेतृत्व प्रदान किया। वर्ष 1995-96 और उसके बाद भी उन्होंने देहरादून में आंदोलन को सक्रिय बनाए रखा। बंद, चक्का जाम, जेल भरो और रेल रोको जैसे आंदोलनों का नेतृत्व कर उन्होंने पृथक राज्य की मांग को मजबूती दी। डोईवाला के प्रेमनगर बाजार स्थित अपनी ससुराल को भी उन्होंने आंदोलनकारियों के लिए महत्वपूर्ण केंद्र बनाया, जहां पर्वतीय क्षेत्रों से आने वाले आंदोलनकारियों के ठहरने की व्यवस्था में सहयोग किया गया।

9 नवंबर 2000 को साकार हुआ पृथक राज्य का सपना

मुख्यमंत्री ने खटीमा, मसूरी और मुजफ्फरनगर की घटनाओं को राज्य आंदोलन के इतिहास के अत्यंत पीड़ादायक अध्याय बताते हुए कहा कि तमाम कठिनाइयों और यातनाओं के बावजूद आंदोलनकारियों ने अपना संघर्ष जारी रखा। उनके त्याग और बलिदान के परिणामस्वरूप 9 नवंबर 2000 को उत्तराखण्ड देश के 27वें राज्य के रूप में अस्तित्व में आया।

उन्होंने कहा कि स्व. रणजीत सिंह वर्मा अविभाजित उत्तर प्रदेश की मसूरी विधानसभा सीट से दो बार विधायक रहे, लेकिन उन्होंने सदैव पृथक राज्य निर्माण के संकल्प को प्राथमिकता दी। राज्य गठन के बाद उन्होंने चुनावी राजनीति से दूरी बनाकर सामाजिक कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाई। उनका जीवन सिद्धांतों के प्रति प्रतिबद्धता और निःस्वार्थ जनसेवा की प्रेरणा देता है।

आंदोलनकारियों के सपनों का उत्तराखण्ड बनाना सरकार का संकल्प

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य आंदोलनकारियों के योगदान को नई पीढ़ी तक पहुंचाना और उनके सपनों के अनुरूप उत्तराखण्ड का निर्माण करना हम सभी की जिम्मेदारी है। राज्य सरकार सुशासन, आत्मनिर्भरता, समग्र विकास और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के लिए निरंतर कार्य कर रही है। सरकार का लक्ष्य ऐसा विकसित उत्तराखण्ड बनाना है, जहां युवाओं को रोजगार के बेहतर अवसर मिलें, मातृशक्ति आत्मनिर्भर बने और विकास का लाभ समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचे।

उन्होंने कहा कि विकसित एवं समृद्ध उत्तराखण्ड का निर्माण ही स्व. रणजीत सिंह वर्मा सहित राज्य निर्माण के लिए संघर्ष करने वाले सभी आंदोलनकारियों के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी। मुख्यमंत्री ने राज्य आंदोलन के शहीदों को नमन करते हुए सभी आंदोलनकारियों के योगदान के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की।

कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल, हंस फाउंडेशन की संस्थापक माता मंगला, वरिष्ठ साहित्यकार गंभीर सिंह पालनी, अजय वर्मा सहित राज्य आंदोलनकारी, जनप्रतिनिधि एवं अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

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