राज्यपाल से मिले पर्यटन सचिव धीराज सिंह गर्ब्याल, चारधाम यात्रा और शीतकालीन पर्यटन की तैयारियों की दी जानकारी
देहरादून। उत्तराखण्ड को वर्षभर पर्यटन गतिविधियों से जोड़ने की दिशा में सरकार ने तैयारियां तेज कर दी हैं। मंगलवार को पर्यटन सचिव धीराज सिंह गर्ब्याल ने लोक भवन में राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि) से भेंट कर प्रदेश में वर्ष 2026 के दौरान संचालित पर्यटन गतिविधियों, चारधाम यात्रा, शीतकालीन पर्यटन और साहसिक पर्यटन को लेकर किए जा रहे प्रयासों की विस्तृत जानकारी दी।
पर्यटन सचिव ने बताया कि वर्ष 2026 में अब तक 56 लाख से अधिक श्रद्धालु चारधाम यात्रा कर चुके हैं। उन्होंने शीतकालीन पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए विभाग द्वारा किए जा रहे प्रयासों के साथ ही साहसिक पर्यटन की प्रस्तावित एवं संचालित गतिविधियों की जानकारी भी राज्यपाल को दी।
हर जिले के लिए तैयार होगा साहसिक पर्यटन कैलेंडर
राज्यपाल ने कहा कि उत्तराखण्ड की भौगोलिक और प्राकृतिक विविधता को देखते हुए पर्यटन को केवल धार्मिक स्थलों और यात्रा तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए। प्रदेश में बारह महीने पर्यटन गतिविधियों को संचालित करने की रणनीति तैयार करने की आवश्यकता है।
उन्होंने पर्यटन विभाग को साहसिक पर्यटन गतिविधियों का जिलावार वार्षिक कैलेंडर तैयार करने के निर्देश दिए। इसमें प्रत्येक जिले की विशेष भौगोलिक परिस्थितियों और पर्यटन क्षमता के अनुरूप ट्रैकिंग, पर्वतारोहण, रिवर राफ्टिंग, पैराग्लाइडिंग, साइक्लिंग, मोटर स्पोर्ट्स सहित अन्य साहसिक गतिविधियों को शामिल करने पर जोर दिया।
राज्यपाल ने कहा कि इससे देश-दुनिया के पर्यटकों को पूरे वर्ष उत्तराखण्ड आने के लिए आकर्षित किया जा सकेगा। साथ ही स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।
हिम तेंदुआ साइटिंग और हिमालयन कार रैली को मिले बढ़ावा
राज्यपाल ने शीतकालीन पर्यटन को प्रदेश की पर्यटन अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार बनाने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि सर्दियों में उत्तराखण्ड की विशिष्ट प्राकृतिक और साहसिक गतिविधियों को देश-दुनिया के पर्यटकों के सामने प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया जाना चाहिए।
उन्होंने प्रकृति प्रेमियों के लिए हिम तेंदुआ साइटिंग, हिमालयन कार रैली और अल्ट्रा मैराथन जैसे आयोजनों को और व्यापक स्तर पर आयोजित करने की आवश्यकता बताई।
कनेक्टिविटी, सुरक्षा और होमस्टे पर भी फोकस
राज्यपाल ने कहा कि शीतकालीन पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए केवल प्रचार-प्रसार पर्याप्त नहीं है। पर्यटकों के बेहतर अनुभव के लिए कनेक्टिविटी, सुरक्षा, स्थानीय सुविधाओं, प्रशिक्षित मानव संसाधन और होमस्टे जैसी व्यवस्थाओं को भी मजबूत करना होगा।
उन्होंने पर्यटन गतिविधियों में स्थानीय समुदायों की भागीदारी सुनिश्चित करने पर जोर देते हुए कहा कि पर्यटन से होने वाली आय का लाभ सीधे स्थानीय लोगों तक पहुंचना चाहिए। इससे युवाओं को अपने गांव और क्षेत्र में ही रोजगार के अवसर मिलेंगे।
राज्यपाल ने स्थानीय संस्कृति, पारंपरिक खान-पान, हस्तशिल्प और लोक परंपराओं को पर्यटन से जोड़ने पर भी जोर दिया। उन्होंने पर्यटन विभाग के प्रयासों की सराहना करते हुए उत्तराखण्ड को बारहमासी पर्यटन गंतव्य के रूप में विकसित करने के लिए योजनाबद्ध और नवाचार आधारित प्रयास जारी रखने की बात कही।