GCC Innovation Summit 2026 में बोले मुख्यमंत्री— ₹50 लाख करोड़ से अधिक के निवेश प्रस्ताव मिले, 15 लाख करोड़ की परियोजनाओं की ग्राउंड ब्रेकिंग; यूपी को ग्लोबल टेक्नोलॉजी और रोजगार का केंद्र बनाने पर जोर
लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उत्तर प्रदेश अब अपनी प्रगति, विकास और आर्थिक बदलावों के जरिए दुनिया को जवाब दे रहा है। असीमित संभावनाओं वाला उत्तर प्रदेश निवेश, इंफ्रास्ट्रक्चर, तकनीक, उद्योग, रोजगार और नवाचार के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। कभी निवेशकों को लखनऊ आने के लिए तैयार करना चुनौती था, लेकिन आज प्रदेश को ₹50 लाख करोड़ से अधिक के निवेश प्रस्ताव मिल चुके हैं। इनमें ₹15 लाख करोड़ की परियोजनाओं की ग्राउंड ब्रेकिंग हो चुकी है, जबकि साढ़े सात लाख करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाएं आगे बढ़ने के लिए तैयार हैं।
मुख्यमंत्री सोमवार को राजधानी लखनऊ में आयोजित GCC Innovation Summit 2026 को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश को ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC), आधुनिक तकनीक और उच्च कौशल वाले रोजगार का प्रमुख केंद्र बनाने के लिए सरकार लगातार काम कर रही है। प्रदेश में निवेश को बढ़ावा देने के लिए 36 सेक्टोरल पॉलिसी लागू की गई हैं, ताकि अलग-अलग क्षेत्रों के निवेशकों को बेहतर अवसर मिल सकें।
₹20 हजार करोड़ से शुरू हुई चर्चा, आज ₹50 लाख करोड़ से अधिक के निवेश प्रस्ताव
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश में निवेश के माहौल में आए बदलाव का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्ष 2015-16 में उत्तर प्रदेश में निवेशक सम्मेलन आयोजित करने की योजना बनी थी, लेकिन उस समय प्रदेश की छवि ऐसी थी कि उद्योग जगत के प्रतिनिधि लखनऊ आने से भी हिचकिचाते थे। निवेश सम्मेलन दिल्ली के पांच सितारा होटल में आयोजित करना पड़ा।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2017 में सरकार बनने के बाद निवेश की संभावनाओं को नए सिरे से तलाशा गया। अधिकारियों ने जब ग्लोबल इन्वेस्टर समिट के लिए ₹20 हजार करोड़ का लक्ष्य प्रस्तावित किया, तो उन्होंने लक्ष्य को बढ़ाकर कम से कम ₹2 लाख करोड़ करने और इसके अनुरूप तैयारी करने के निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री के मुताबिक, पहले इन्वेस्टर समिट में ₹4.65 लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए। आज यह आंकड़ा ₹50 लाख करोड़ से अधिक पहुंच चुका है। ₹15 लाख करोड़ की परियोजनाओं की ग्राउंड ब्रेकिंग हो चुकी है और साढ़े सात लाख करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाएं आगे बढ़ने के लिए तैयार हैं।
10 लाख युवाओं को सरकारी नौकरी, अर्थव्यवस्था को मिली नई गति
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में रोजगार और आर्थिक विकास के क्षेत्र में उल्लेखनीय बदलाव आया है। पिछले साढ़े नौ वर्षों में 10 लाख युवाओं को सरकारी नौकरी दी गई है। उनके अनुसार, पिछले नौ वर्षों में प्रदेश की जीएसडीपी, प्रति व्यक्ति आय, बजट और महिला कार्यबल की भागीदारी में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश अब बीमारू राज्य की छवि से बाहर निकलकर राजस्व अधिशेष राज्य के रूप में उभरा है। प्रदेश के बजट में दो लाख करोड़ रुपये से अधिक का पूंजीगत व्यय इंफ्रास्ट्रक्चर पर किया जा रहा है। सड़क, बिजली, परिवहन और औद्योगिक सुविधाओं के विस्तार से कारोबार तथा निवेश के लिए बेहतर माहौल तैयार हुआ है।
देश के एक्सप्रेसवे नेटवर्क में यूपी की बड़ी हिस्सेदारी, पांच अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश में कनेक्टिविटी और आधारभूत ढांचे का तेजी से विस्तार हुआ है। उनके अनुसार, देश के एक्सप्रेसवे नेटवर्क का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा उत्तर प्रदेश में है। प्रदेश में पांच अंतरराष्ट्रीय और 17 घरेलू एयरपोर्ट क्रियाशील हैं। इसके साथ ही मेट्रो सेवाओं, रेल नेटवर्क और अन्य परिवहन सुविधाओं का विस्तार हुआ है।
उन्होंने बताया कि प्रदेश के पास लगभग 75 हजार एकड़ का लैंड बैंक है, जिसका उपयोग औद्योगिक विकास और निवेश परियोजनाओं के लिए किया जा रहा है। सरकार का लक्ष्य बेहतर कनेक्टिविटी, औद्योगिक भूमि और निवेश अनुकूल नीतियों के माध्यम से उत्तर प्रदेश को देश के प्रमुख आर्थिक केंद्रों में शामिल करना है।
दो लाख STEM ग्रेजुएट, 25 हजार स्टार्टअप से मजबूत होगा टेक्नोलॉजी इकोसिस्टम
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश में प्रतिवर्ष लगभग दो लाख STEM ग्रेजुएट तैयार हो रहे हैं। युवाओं को उद्योगों की जरूरत के अनुरूप प्रशिक्षित करने के लिए कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा और नवाचार पर जोर दिया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), मशीन लर्निंग, क्लाउड कंप्यूटिंग, रोबोटिक्स, 3डी प्रिंटिंग, डेटा एनालिटिक्स, साइबर सिक्योरिटी, इंटरनेट ऑफ थिंग्स, ड्रोन टेक्नोलॉजी और ग्रीन हाइड्रोजन जैसे क्षेत्रों में अनुसंधान एवं विकास को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसके लिए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस विकसित किए जा रहे हैं और सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्कों का विस्तार किया जा रहा है।
सीएम योगी ने कहा कि वर्ष 2017 से पहले प्रदेश में करीब 120 स्टार्टअप थे, जबकि अब इनकी संख्या बढ़कर लगभग 25 हजार हो गई है। नोएडा और ग्रेटर नोएडा आज आईटी, इलेक्ट्रॉनिक्स, मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर के प्रमुख केंद्र बनकर उभरे हैं।
जेवर क्षेत्र में औद्योगिक क्रांति, सेमीकंडक्टर यूनिट का काम शुरू
मुख्यमंत्री ने यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यीडा) क्षेत्र में हो रहे विकास कार्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि यहां लगभग 25 हजार हेक्टेयर का लैंड बैंक उपलब्ध है। इस क्षेत्र में फिल्म सिटी, टॉय पार्क, अपैरल पार्क, मेडिकल डिवाइस पार्क, एमएसएमई पार्क, डेटा सेंटर पार्क, हैंडीक्राफ्ट पार्क और लॉजिस्टिक्स हब विकसित किए जा रहे हैं।
उन्होंने बताया कि क्षेत्र में सेमीकंडक्टर चिप निर्माण से जुड़ी परियोजना का काम भी शुरू हो चुका है। मुख्यमंत्री के अनुसार, इन परियोजनाओं से प्रदेश में औद्योगिक निवेश बढ़ेगा और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर तैयार होंगे।
उन्होंने ईज ऑफ डूइंग बिजनेस और डीरेगुलेशन के क्षेत्र में प्रदेश की उपलब्धियों का भी उल्लेख किया। कहा कि निवेशकों को अब सिंगल विंडो क्लीयरेंस की सुविधा दी जा रही है और स्वीकृत प्रोत्साहन राशि सीधे उनके बैंक खातों में भेजने की व्यवस्था विकसित की गई है।
रक्षा उत्पादन में यूपी की नई पहचान, ब्रह्मोस परियोजना से बढ़ेंगी संभावनाएं
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश रक्षा विनिर्माण के क्षेत्र में भी अपनी पहचान मजबूत कर रहा है। लखनऊ, कानपुर, झांसी, आगरा, अलीगढ़ और चित्रकूट में डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग कॉरिडोर विकसित किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि रक्षा उत्पादन क्षेत्र में प्रदेश को ₹35 हजार करोड़ के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं।
ब्रह्मोस मिसाइल परियोजना का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि लखनऊ में इसके निर्माण से प्रदेश की तकनीकी और औद्योगिक क्षमताओं को नई दिशा मिली है। परियोजना से स्थानीय युवाओं को रोजगार और तकनीकी क्षेत्र में काम करने के अवसर मिल रहे हैं।
उन्होंने कहा कि प्रदेश में 27 इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग एंड लॉजिस्टिक्स क्लस्टर विकसित किए जा रहे हैं, जो विनिर्माण, भंडारण और परिवहन से जुड़ी गतिविधियों को गति देंगे।
ODOP से स्थानीय उत्पादों को पहचान, 96 लाख MSME इकाइयों को बढ़ावा
मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘एक जिला, एक उत्पाद’ (ODOP) योजना ने उत्तर प्रदेश के पारंपरिक उत्पादों, कारीगरों और छोटे कारोबारियों को नई पहचान दिलाने में भूमिका निभाई है। स्थानीय उत्पादों को बाजार से जोड़ने और रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए सरकार ने एमएसएमई क्षेत्र को प्रोत्साहित किया है।
उन्होंने बताया कि प्रदेश में लगभग 96 लाख एमएसएमई इकाइयां कार्यरत हैं, जिनसे तीन करोड़ 25 लाख से अधिक लोग जुड़े हुए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि कोविड कालखंड में दूसरे राज्यों से लौटने वाले श्रमिकों और कारीगरों को प्रदेश में रोजगार तथा सम्मानजनक अवसर उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता रही।
निवेशकों के लिए बेहतर माहौल, उत्तर प्रदेश को GCC हब बनाने का लक्ष्य
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि डिजिटल इंडिया, स्किल इंडिया, मेक इन इंडिया, सेमीकंडक्टर मिशन और एआई मिशन जैसी पहलों ने देश में तकनीक आधारित विकास को गति दी है। उत्तर प्रदेश इन संभावनाओं का लाभ उठाकर वैश्विक कंपनियों के लिए पसंदीदा निवेश स्थल बनना चाहता है।
उन्होंने कहा कि प्रदेश की युवा आबादी, तकनीकी शिक्षा संस्थान, बेहतर कनेक्टिविटी, औद्योगिक नीतियां और बढ़ता स्टार्टअप इकोसिस्टम ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर के विकास के लिए अनुकूल आधार प्रदान करते हैं। सरकार का प्रयास है कि अधिक से अधिक कंपनियां प्रदेश में अपने तकनीकी, अनुसंधान, डिजिटल सेवाओं और नवाचार से जुड़े केंद्र स्थापित करें।
प्राचीन ज्ञान परंपरा से आधुनिक नवाचार तक का सफर
मुख्यमंत्री ने उत्तर प्रदेश की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत का उल्लेख करते हुए कहा कि यह भूमि प्राचीन काल से ज्ञान, दर्शन और विचार-विमर्श का केंद्र रही है। काशी, प्रयागराज और नैमिषारण्य जैसे स्थानों ने भारतीय ज्ञान परंपरा को समृद्ध किया है। उन्होंने कहा कि प्राचीन ज्ञान परंपरा की तरह आधुनिक समय में भी उत्तर प्रदेश को अनुसंधान, नवाचार और वैश्विक विचारों के आदान-प्रदान का प्रमुख केंद्र बनाना है।
मुख्यमंत्री ने उद्योग जगत के प्रतिनिधियों से प्रदेश की विकास यात्रा में सहभागी बनने का आह्वान करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश में निवेश और रोजगार की असीमित संभावनाएं हैं। सरकार का लक्ष्य तकनीक, उद्योग, कौशल विकास और नवाचार को एक साथ आगे बढ़ाकर प्रदेश को राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी मजबूत पहचान दिलाना है।
कार्यक्रम में औद्योगिक विकास मंत्री नंद गोपाल गुप्ता नंदी, राज्य मंत्री जसवंत सिंह सैनी, अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास आयुक्त दीपक कुमार, अपर मुख्य सचिव आलोक कुमार, आईआईटी कानपुर के निदेशक प्रो. मनिंद्र अग्रवाल सहित उद्योग जगत के कई प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
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