लखनऊ। उत्तर प्रदेश में तकनीक आधारित फॉरेंसिक शिक्षा को बढ़ावा देने की दिशा में उत्तर प्रदेश स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंस (यूपीएसआईएफएस), लखनऊ में क्वांटम टेक्नोलॉजी पर स्टेज प्रेजेंटेशन आयोजित किया गया। कार्यक्रम में लॉ, बीटेक और एमटेक के छात्र-छात्राओं ने अत्याधुनिक तकनीक के जरिए भविष्य की ट्रैफिक समस्याओं के समाधान की संभावनाएं प्रस्तुत कीं।
छात्रों ने ‘डिस्कवरी एवं क्वांटम कंप्यूटिंग के माध्यम से यातायात समस्या का समाधान’ विषय पर विशेषज्ञों के समक्ष अपनी प्रस्तुतियां दीं। इसमें ट्रैफिक कंजेशन कम करने, वाहनों के आइडल टाइम को घटाने और कम समय में बेहतर रूट निर्धारित करने के लिए क्वांटम कंप्यूटिंग के संभावित इस्तेमाल को प्रदर्शित किया गया।
कम होगा ईंधन खर्च और CO₂ उत्सर्जन
प्रेजेंटेशन में छात्रों ने बताया कि ट्रैफिक जाम और वाहनों के लंबे समय तक खड़े रहने से ईंधन की खपत तथा CO₂ उत्सर्जन बढ़ता है। क्वांटम तकनीक आधारित स्मार्ट रूटिंग के माध्यम से वाहनों का आइडल टाइम कम कर ईंधन की बचत, प्रदूषण में कमी और ग्रीन मोबिलिटी को बढ़ावा दिया जा सकता है।
एंबुलेंस और पुलिस के लिए भी मिलेगी प्राथमिकता
छात्रों ने फॉरेंसिक और इमरजेंसी लॉजिस्टिक्स के क्षेत्र में भी क्वांटम कंप्यूटिंग के इस्तेमाल की संभावनाएं बताईं। इसके जरिए एंबुलेंस, पुलिस और फॉरेंसिक टीमों के लिए प्राथमिकता वाले ट्रैफिक रूट तैयार करने और आपात स्थिति में तेजी से गंतव्य तक पहुंचने में मदद मिल सकती है।
डेटा सुरक्षा के लिए TLS 1.3 एन्क्रिप्शन और GDPR आधारित सुरक्षा मानकों के इस्तेमाल की संभावनाएं भी प्रस्तुत की गईं।
विशेषज्ञों ने छात्रों की तकनीकी दक्षता को सराहा
कार्यक्रम में विषय विशेषज्ञ एवं आईटी एक्सपर्ट (यूएसए) डॉ. पवन शर्मा ने छात्रों की तकनीकी समझ और प्रस्तुति की सराहना की। उन्होंने कहा कि संस्थान में छात्रों को जिस तरह का तकनीकी वातावरण उपलब्ध कराया जा रहा है, वह सराहनीय है। छात्रों ने क्वांटम टेक्नोलॉजी जैसे उभरते क्षेत्र में अपनी मजबूत पकड़ प्रदर्शित की है।
संस्थान के संस्थापक निदेशक डॉ. जीके गोस्वामी ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन के अनुरूप तकनीक आधारित फॉरेंसिक शिक्षा को बढ़ावा दिया जा रहा है। ऐसे कार्यक्रमों से युवा पीढ़ी को दुनिया में हो रहे अत्याधुनिक तकनीकी प्रयोगों से जुड़ने का अवसर मिलता है।
उन्होंने कहा कि भविष्य में क्वांटम चिप्स और क्वांटम क्रिप्टोग्राफी जैसी तकनीकों का फॉरेंसिक साइंस एवं उसके अनुप्रयोगों में महत्वपूर्ण योगदान हो सकता है। संस्थान क्वांटम कंप्यूटिंग के क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभाने की दिशा में कार्य कर रहा है।
कार्यक्रम में अपर निदेशक संजीव सुमन, उप निदेशक चिरंजीव मुखर्जी, अतुल यादव, डॉ. निमिशा, डॉ. सेंथिल शिवासुब्रमण्यम और जनसंपर्क अधिकारी संतोष तिवारी सहित अन्य अधिकारी एवं विशेषज्ञ मौजूद रहे।