गुड टच-बैड टच, पॉक्सो एक्ट और साइबर क्राइम से बचाव की दी जानकारी, कैंप के बाद तीन बच्चों का रेस्क्यू
ऋषिकेश। जिलाधिकारी देहरादून के निर्देशों के क्रम में शुक्रवार, 18 सितंबर 2026 को श्री भरत मंदिर इंटर कॉलेज, गंगा नगर ऋषिकेश में बच्चों की सुरक्षा एवं अधिकारों को लेकर चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में करीब 900 छात्र-छात्राओं और 18 अध्यापकों ने प्रतिभाग किया।
जिला प्रोबेशन अधिकारी के निर्देशन में आयोजित जागरूकता कैंप में ऋषिकेश चाइल्ड हेल्पलाइन टीम तथा जिला बाल संरक्षण इकाई (DCPU) के सदस्यों ने बच्चों और शिक्षकों को चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 की विस्तृत जानकारी दी। टीम ने बताया कि 1098 संकट में फंसे बच्चों की सहायता के लिए निःशुल्क 24×7 आपातकालीन सेवा है।
जागरूकता कार्यक्रम के दौरान अनाथ, गरीब एवं बेसहारा बच्चों की सहायता, खोए एवं पाए गए बच्चों, बाल श्रम, भिक्षावृत्ति, बाल विवाह की रोकथाम तथा बच्चों की शिक्षा से जुड़े विषयों पर जानकारी दी गई। इसके साथ ही बच्चों को गुड टच-बैड टच, पॉक्सो कानून और साइबर क्राइम से बचाव के प्रति भी जागरूक किया गया।
टीम ने बच्चों और शिक्षकों को बाल कल्याण समिति की भूमिका तथा महिलाओं एवं बच्चों से संबंधित विभिन्न संस्थाओं और सहायता सेवाओं के बारे में भी जानकारी दी। बताया गया कि महिलाओं से संबंधित किसी भी समस्या के लिए 181, जबकि बच्चों से संबंधित परेशानी या संकट की स्थिति में 1098 अथवा 112 पर संपर्क किया जा सकता है। जरूरत पड़ने पर नजदीकी चाइल्ड हेल्पलाइन कार्यालय में भी सहायता ली जा सकती है।
कैंप के बाद तीन बच्चों का रेस्क्यू
जागरूकता कार्यक्रम समाप्त होने के बाद टीम ने तपोवन क्षेत्र में कूड़ा बीन रहे तीन बच्चों को रेस्क्यू किया। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार ये बच्चे नटराज चौक क्षेत्र के रहने वाले हैं। रेस्क्यू के बाद बच्चों की तपोवन पुलिस चौकी में जीडी दर्ज कराई गई। इसके पश्चात बच्चों को आवश्यक मेडिकल परीक्षण के लिए ले जाया गया।
कार्यक्रम में सुपरवाइजर मीना खरोला एवं रंजना उनियाल, केस वर्कर अनिल बिष्ट, DCPU सदस्य सम्पूर्णा भट्ट एवं कविता पांडे, रेलवे चाइल्ड हेल्पलाइन टीम सदस्य सविता गोगिया तथा भिक्षावृत्ति टीम के कोऑर्डिनेटर राहुल सती एवं मिनाक्षी नाथ सहित संबंधित टीम के सदस्य मौजूद रहे।
कार्यक्रम का उद्देश्य बच्चों को उनके अधिकारों, सुरक्षा उपायों और संकट की स्थिति में उपलब्ध सहायता सेवाओं के प्रति जागरूक करना रहा।