बहराइच में सौर ऊर्जा से 100 एकड़ खेतों की सिंचाई, मिर्जापुर में 1,221 महिलाएं चला रहीं किसान उत्पादक संगठन, गोरखपुर में बायोफ्लॉक तकनीक से मछली पालन

लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में ग्रामीण आजीविका और महिला सशक्तीकरण को बढ़ावा देने के प्रयासों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है। उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (यूपीएसआरएलएम) की तीन अभिनव पहलों को भारत सरकार के कैबिनेट सचिवालय द्वारा देशभर से चयनित 27 उत्कृष्ट प्रशासनिक पहलों में शामिल किया गया है। इन मॉडलों की कार्यप्रणाली और प्रभाव का आकलन करने के लिए केंद्र सरकार की टीम ने बहराइच, मिर्जापुर और गोरखपुर का स्थलीय निरीक्षण किया।
इन तीन पहलों में बहराइच का सामुदायिक सौर ऊर्जा आधारित आजीविका मॉडल, मिर्जापुर का महिला नेतृत्व वाला किसान उत्पादक संगठन और गोरखपुर का आधुनिक बायोफ्लॉक मत्स्य पालन मॉडल शामिल है। निरीक्षण के दौरान कैबिनेट सचिवालय के अतिरिक्त सचिव सौरभ कुमार तिवारी ने ग्रामीण विकास, स्वच्छ ऊर्जा और महिला सशक्तीकरण के क्षेत्र में उत्तर प्रदेश के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने इन मॉडलों को अन्य राज्यों के लिए भी प्रेरणादायक बताया।
बहराइच में सौर ऊर्जा से 100 एकड़ कृषि भूमि की सिंचाई

केंद्रीय टीम ने 14 अक्टूबर को बहराइच जिले के मिहिनपुरवा विकासखंड की घूमना भारू ग्राम पंचायत में सामुदायिक सौर ऊर्जा परियोजना का निरीक्षण किया। ट्रांसफॉर्म रूरल इंडिया (टीआरआई) के सहयोग से यहां 43 किलोवाट पीक क्षमता का सामुदायिक सोलर माइक्रोग्रिड स्थापित किया गया है।
इस परियोजना के माध्यम से करीब 200 परिवारों की 100 एकड़ कृषि भूमि को 10 सौर पंपों के जरिए सिंचाई की सुविधा मिल रही है। ग्राम विद्युत समिति ई-रिक्शा, ई-स्कूटी और मोबाइल चार्जिंग जैसी सेवाएं भी संचालित कर रही है। इससे ग्रामीणों को स्वच्छ ऊर्जा का लाभ मिलने के साथ रोजगार और आय के नए अवसर उपलब्ध हो रहे हैं।
मिर्जापुर में 1,221 महिला शेयरधारकों का किसान उत्पादक संगठन
मिर्जापुर के छानबे विकासखंड में 19 अक्टूबर को केंद्रीय टीम ने छनवर एग्रो फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड का निरीक्षण किया। वर्ष 2022-23 में स्थापित इस किसान उत्पादक संगठन की खासियत यह है कि इसका संचालन महिलाएं कर रही हैं। संगठन से वर्तमान में 1,221 महिला शेयरधारक जुड़ी हुई हैं।
महिलाएं कृषि उत्पादों की खरीद-बिक्री, जैविक खाद उत्पादन, कृषि उपकरण उपलब्ध कराने और उत्पादों के विपणन जैसी गतिविधियों के माध्यम से सामूहिक उद्यम को आगे बढ़ा रही हैं। महिलाओं ने अधिकारियों को बताया कि संगठन ने सामूहिक प्रयासों से 25 मीट्रिक टन गेहूं की आपूर्ति सफलतापूर्वक पूरी की है।
संगठन वर्तमान में करीब 10.50 लाख रुपये का व्यावसायिक मार्जिन अर्जित कर रहा है, जो उसके वार्षिक संचालन खर्च से अधिक है। इसका लक्ष्य महिला सदस्यों की आय में वृद्धि कर उन्हें ‘लखपति दीदी’ बनाना है।
केंद्रीय टीम ने इस दौरान विंध्य मार्ट का भी निरीक्षण किया और स्वयं सहायता समूहों के स्थानीय उत्पादों के विपणन, महिलाओं के लिए रोजगार के अवसरों तथा ग्रामीण उद्यमिता को बढ़ावा देने के प्रयासों की जानकारी ली।
गोरखपुर में बायोफ्लॉक तकनीक से आत्मनिर्भर बन रहीं महिलाएं
गोरखपुर जिले के खजनी विकासखंड की छताही ग्राम पंचायत में 26 अक्टूबर को केंद्रीय टीम ने जल परी प्रेरणा महिला मत्स्य उत्पादक समूह की गतिविधियों का जायजा लिया। यहां स्वयं सहायता समूह की महिलाएं आधुनिक बायोफ्लॉक तकनीक के माध्यम से मछली पालन कर रही हैं।
ग्राम पंचायत में पांच बायोफ्लॉक इकाइयां स्थापित की गई हैं। इस तकनीक के जरिए सीमित स्थान और नियंत्रित जल व्यवस्था में वैज्ञानिक तरीके से मछली पालन किया जा सकता है। इससे ग्रामीण महिलाओं के लिए स्थानीय स्तर पर स्वरोजगार और आय बढ़ाने की संभावनाएं विकसित हो रही हैं।
समूह की महिलाओं ने अधिकारियों को मछली पालन की कार्यप्रणाली और अब तक के अनुभवों से अवगत कराया। साथ ही भविष्य में बायोफ्लॉक इकाइयों की संख्या बढ़ाने की योजना भी साझा की।
अन्य राज्यों में भी लागू हो सकते हैं ये मॉडल
तीनों जिलों के दौरे के बाद कैबिनेट सचिवालय के अतिरिक्त सचिव सौरभ कुमार तिवारी ने उत्तर प्रदेश की पहलों की सराहना की। विशेष रूप से बहराइच के सामुदायिक सोलर माइक्रोग्रिड मॉडल को अन्य क्षेत्रों में लागू करने की संभावनाओं पर चर्चा की गई।
केंद्र सरकार के कैबिनेट सचिवालय ने विभिन्न राज्यों से बेहतर प्रशासनिक कार्यों और नवाचारों की जानकारी मांगी थी। देशभर से चयनित 27 पहलों के सत्यापन के लिए नेशनल सेंटर फॉर गुड गवर्नेंस (एनसीजीजी) के सहयोग से अधिकारियों की टीमें संबंधित राज्यों में भेजी गईं। इसी प्रक्रिया के तहत उत्तर प्रदेश के इन तीन मॉडलों का स्थलीय सत्यापन किया गया।
इन पहलों को सफल बनाने में उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन, जिला प्रशासन, ट्रांसफॉर्म रूरल इंडिया, सहयोगी संस्थाओं और महिला स्वयं सहायता समूहों की अहम भूमिका रही है। इन मॉडलों का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ाना, महिलाओं की आर्थिक भागीदारी मजबूत करना और स्थानीय संसाधनों का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करना है।
ग्रामीण विकास की नई तस्वीर: सौर ऊर्जा से सिंचाई, महिलाओं के नेतृत्व में कृषि कारोबार और आधुनिक तकनीक से मत्स्य पालन जैसे प्रयास उत्तर प्रदेश में ग्रामीण आजीविका के नए विकल्प विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माने जा रहे हैं।