शिक्षक समाज और राष्ट्र निर्माण की रीढ़ : ऋतु खण्डूडी भूषण

कोटद्वार। शिक्षक दिवस के अवसर पर कोटद्वार स्थित सुंदरियाल वेडिंग प्वाइंट में भव्य शिक्षक सम्मान समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम का आयोजन उत्तराखंड विधानसभा अध्यक्ष एवं कोटद्वार विधायक ऋतु खण्डूडी भूषण द्वारा किया गया। समारोह में गढ़वाल लोकसभा सांसद अनिल बलूनी मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहे।

कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इसके बाद पीएमश्री राजकीय इंटर कॉलेज, कोटद्वार की छात्राओं ने स्वागत गीत की मनमोहक प्रस्तुति देकर समारोह में समां बांध दिया। अतिथियों का तिलक लगाकर स्वागत किया गया।
शिक्षा के क्षेत्र में योगदान के लिए शिक्षक सम्मानित
समारोह में कोटद्वार क्षेत्र के विभिन्न महाविद्यालयों के प्राचार्य एवं प्राध्यापक, राजकीय विद्यालयों के प्रधानाचार्य एवं शिक्षक-शिक्षिकाएं तथा निजी शिक्षण संस्थानों का संचालन करने वाले शिक्षकों को शिक्षा के क्षेत्र में उनके महत्वपूर्ण योगदान के लिए सम्मानित किया गया।
इस दौरान बड़ी संख्या में शिक्षकों की मौजूदगी रही। कार्यक्रम में गौ सेवा आयोग के अध्यक्ष राजेंद्र अन्थवाल, डॉ. पी.एस. राणा, कुलपति बीजीयू कोटद्वार, डॉ. डी.एस. नेगी, प्राचार्य राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय कोटद्वार, डॉ. हरीश कुमार भारती, श्रीमती मनीषा मजीजा, प्रधानाचार्य केंद्रीय विद्यालय कोटद्वार, सतीश लखेड़ा तथा बिपिन कैंथोला, पूर्व प्रदेश प्रवक्ता सहित अनेक गणमान्यजन उपस्थित रहे।
‘शिक्षक केवल पढ़ाते नहीं, भविष्य गढ़ते हैं’
विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खण्डूडी भूषण ने अपने संबोधन में कहा कि शिक्षक केवल विद्यार्थियों को शिक्षा देने तक सीमित नहीं रहते, बल्कि उनके व्यक्तित्व, संस्कार, चरित्र और भविष्य का निर्माण करते हैं। उन्होंने कहा कि समाज की पहली गुरु मां होती हैं और इसके बाद गुरुजनों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है।
उन्होंने कहा कि शिक्षक अपने ज्ञान, अनुभव और संस्कारों के माध्यम से नई पीढ़ी को सही दिशा प्रदान करते हैं। ऐसे में शिक्षकों का सम्मान वास्तव में उस पूरी शिक्षा व्यवस्था और मूल्यों का सम्मान है, जो समाज को मजबूत बनाने का कार्य करती है।
राष्ट्र निर्माण में शिक्षकों की भूमिका अहम : अनिल बलूनी

गढ़वाल लोकसभा सांसद अनिल बलूनी ने कहा कि शिक्षक समाज के मार्गदर्शक और राष्ट्र निर्माण के महत्वपूर्ण स्तंभ हैं। शिक्षक विद्यार्थियों को केवल पुस्तकीय ज्ञान ही नहीं देते, बल्कि उन्हें जीवन-मूल्यों, अनुशासन और जिम्मेदारियों का बोध भी कराते हैं।
उन्होंने कहा कि सशक्त, शिक्षित और संस्कारित समाज के निर्माण में शिक्षकों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। शिक्षकों के योगदान को सम्मानित करना समाज की जिम्मेदारी भी है और गौरव का विषय भी।
शिक्षा का उद्देश्य संपूर्ण व्यक्तित्व विकास : डॉ. पी.एस. राणा
डॉ. पी.एस. राणा ने कहा कि शिक्षक विद्यार्थियों को ज्ञान देने के साथ-साथ उनमें संस्कार, अनुशासन और नैतिक मूल्यों का विकास करते हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षा केवल पुस्तकों तक सीमित नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों के संपूर्ण व्यक्तित्व का विकास भी इसका महत्वपूर्ण उद्देश्य है।
वहीं डॉ. डी.एस. नेगी ने कहा कि शिक्षक राष्ट्र की भावी पीढ़ी के निर्माता हैं। विद्यार्थियों को सही दिशा देने में शिक्षकों का योगदान अमूल्य है। शिक्षक सम्मान जैसे आयोजन समाज की ओर से शिक्षकों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का सार्थक माध्यम हैं। इससे शिक्षकों का उत्साह और मनोबल भी बढ़ता है।
सम्मान पाकर शिक्षकों ने जताया आभार
समारोह में सम्मानित हुए शिक्षकों ने विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खण्डूडी भूषण और सांसद अनिल बलूनी का आभार व्यक्त किया। शिक्षकों ने कहा कि उनके सम्मान के लिए आयोजित यह कार्यक्रम उनके लिए गौरव और प्रेरणा का विषय है।
शिक्षकों ने विशेष रूप से निजी शिक्षण संस्थानों में कार्यरत शिक्षकों को भी सम्मान दिए जाने को सराहनीय पहल बताया। उन्होंने कहा कि शिक्षक चाहे किसी भी संस्थान में कार्यरत हों, उनका उद्देश्य समाज और राष्ट्र की भावी पीढ़ी को शिक्षित एवं संस्कारित करना है।
समारोह ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि शिक्षकों का सम्मान केवल एक दिन का आयोजन नहीं, बल्कि उनके ज्ञान, समर्पण और राष्ट्र निर्माण में योगदान के प्रति समाज की कृतज्ञता का प्रतीक है।