मसूरी। मसूरी के झड़ीपानी क्षेत्र में रेलवे भूमि विवाद एक बार फिर गरमा गया। शनिवार को रेलवे के अधिकारी भारी पुलिस बल के साथ क्षेत्र में पहुंचे और कथित रेलवे भूमि पर बने लगभग 60 से 70 मकानों पर नोटिस चस्पा किए। इस कार्रवाई के दौरान स्थानीय लोगों ने विरोध जताते हुए रेलवे अधिकारियों से भूमि संबंधी दस्तावेज दिखाने की मांग की।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि उनके पास संबंधित भूमि की रजिस्ट्री और वैध दस्तावेज मौजूद हैं तथा पूरा मामला न्यायालय में लंबित है। ऐसे में बिना स्पष्ट दस्तावेज प्रस्तुत किए नोटिस चस्पा करना उचित नहीं है।
रेलवे अधिकारियों ने इस दौरान ब्रिटिश काल से संचालित नगर पालिका की टोल चौकी पर भी नोटिस चस्पा किया, जिस पर लोगों ने कड़ी आपत्ति जताई। स्थानीय निवासी मुकुल सेमवाल ने कहा कि उनका परिवार पिछले लगभग 60 वर्षों से यहां रह रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि पहली बार किसी सरकारी भवन पर रेलवे ने नोटिस लगाया है, जबकि वह नगर पालिका की संपत्ति है। इससे लोगों में मानसिक तनाव का माहौल बन गया है।
स्थानीय निवासी कलावती शर्मा ने कहा कि उनका परिवार छह दशक से अधिक समय से यहां निवास कर रहा है। उन्होंने जीवनभर की कमाई से अपना घर बनाया, लेकिन अब रेलवे उस जमीन पर अपना दावा कर लोगों को परेशान कर रहा है।
वहीं भावना गोस्वामी ने सवाल उठाया कि यदि नोटिस न्यायालय के आदेश पर जारी किए गए हैं तो अधिकारियों को लोगों के नाम पूछने की आवश्यकता क्यों पड़ी। उन्होंने बताया कि एसडीएम की मौजूदगी में पहले ही भूमि का सीमांकन किया जा चुका है।
दूसरी ओर, रेलवे के सीनियर सेक्शन इंजीनियर आशु कुमार शर्मा ने कहा कि रेलवे अपनी भूमि पर हुए कथित अवैध कब्जों के संबंध में नोटिस जारी कर रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग सरकारी कार्य में बाधा डाल रहे हैं। उनका कहना था कि कार्रवाई न्यायालय के निर्देशों के तहत की जा रही है और यदि नगर पालिका की संपत्ति का मामला होगा तो संबंधित विभाग को भी नोटिस दिया जाएगा।
फिलहाल झड़ीपानी रेलवे भूमि विवाद को लेकर स्थानीय लोगों और रेलवे प्रशासन के बीच तनाव बना हुआ है। चूंकि मामला न्यायालय में विचाराधीन है, इसलिए अब सभी की निगाहें आगामी कानूनी प्रक्रिया और न्यायालय के फैसले पर टिकी हैं।