विश्व बाघ दिवस पर रामगढ़ में जागरूकता की अलख, बच्चों ने नाटक-चित्रकला से दिया वन्यजीव संरक्षण का संदेश

टाइगर रिजर्व की पहल, विद्यालय में पौधारोपण, लघु फिल्म और प्रतियोगिताओं के माध्यम से बाघ संरक्षण का दिया संदेश

देहरादून। अंतर्राष्ट्रीय बाघ दिवस के अवसर पर राजाजी टाइगर रिजर्व की रामगढ़ रेंज द्वारा राजकीय प्राथमिक विद्यालय रामगढ़ में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य छात्र-छात्राओं, अभिभावकों और स्थानीय लोगों को बाघों एवं वनों के संरक्षण के प्रति जागरूक करना था।

कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि एवं क्षेत्रीय पार्षद सोबत चंद्र रमोला द्वारा विद्यालय परिसर में आँवले का पौधा लगाकर किया गया। इस दौरान विद्यालय के प्रधानाध्यापक अरविन्द सिंह सोलंकी ने कहा कि बाघ और वन एक-दूसरे के पूरक हैं तथा इनके संरक्षण के लिए समाज में जनजागरूकता अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने बताया कि इसी उद्देश्य से राजाजी टाइगर रिजर्व द्वारा विद्यालय में यह विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया।

कार्यक्रम के दौरान छात्र-छात्राओं ने बाघ संरक्षण विषय पर आकर्षक चित्रकला एवं निबंध प्रतियोगिता में भाग लिया, जबकि वन संरक्षण पर आधारित नाटक प्रस्तुत कर सभी को प्रकृति संरक्षण का संदेश दिया। बच्चों को स्मार्ट टीवी के माध्यम से बाघों और वनों के संरक्षण पर आधारित लघु फिल्म भी दिखाई गई, जिससे उन्होंने वन्यजीवों के महत्व को समझा।

वन आरक्षी सुभाष रावत ने अंतर्राष्ट्रीय बाघ दिवस के इतिहास पर प्रकाश डालते हुए बताया कि वर्ष 2010 में रूस के सेंट पीटर्सबर्ग में आयोजित टाइगर समिट के बाद प्रत्येक वर्ष 29 जुलाई को यह दिवस मनाने का निर्णय लिया गया। उन्होंने कहा कि वर्तमान में भारत में 58 टाइगर रिजर्व बाघों और उनके प्राकृतिक आवासों के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए रामगढ़ रेंज की वन क्षेत्राधिकारी उर्वशी गौतम ने कहा कि बाघ पारिस्थितिकी तंत्र के शीर्ष शिकारी होने के साथ-साथ ‘अंब्रेला प्रजाति’ हैं, जिनके संरक्षण से पूरे वन पारिस्थितिकी तंत्र की सुरक्षा सुनिश्चित होती है।

उन्होंने बताया कि वर्ष 1973 में शुरू की गई प्रोजेक्ट टाइगर योजना के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। वर्ष 2006 में देश में बाघों की संख्या 1,411 थी, जो बढ़कर अब 3,682 हो गई है। उन्होंने कहा कि बाघों की संख्या के मामले में मध्य प्रदेश और कर्नाटक के बाद उत्तराखंड देश में तीसरे स्थान पर है तथा विश्व के लगभग 75 प्रतिशत बाघ भारत में पाए जाते हैं।

मुख्य अतिथि सोबत चंद्र रमोला ने कहा कि प्रकृति और वन्यजीवों की सुरक्षा का सबसे बड़ा दायित्व मनुष्य का है। उन्होंने सभी छात्र-छात्राओं और अभिभावकों से अपने आसपास के वनों, वन्यजीवों और पर्यावरण की रक्षा का संकल्प लेने का आह्वान किया।

कार्यक्रम में समाजसेवी जगदीश भट्ट, अक्षत सकलानी, बीट प्रभारी चंद्र किशोर बडोनी, वन आरक्षी विकास थापा, सहायक अध्यापिका मीना घिल्डियाल, मधुलिका, भोजन माता विमला देवी सहित बड़ी संख्या में अभिभावक एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

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