वीबीजी-रामजी कर्मचारियों की मांग पर सीएम धामी गंभीर, जल्द समाधान का दिया आश्वासन

देहरादून। उत्तराखंड में विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन ग्रामीण (वीबीजी-रामजी) के तहत कार्यरत संविदा एवं मानदेय कर्मचारियों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कर्मचारियों के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात के दौरान उनके समायोजन, सेवा सुरक्षा और स्थायीकरण की दिशा में जल्द सकारात्मक कार्रवाई का भरोसा दिया है।

मुख्यमंत्री आवास स्थित कैंप कार्यालय में हुई बैठक में कर्मचारी संगठन के प्रतिनिधियों ने वर्षों से कम मानदेय पर कार्य करने, नौकरी की अनिश्चितता और आर्थिक कठिनाइयों का मुद्दा उठाते हुए नियमित पदों के सृजन तथा राजकीय समायोजन की मांग रखी। उन्होंने कहा कि लंबे समय से मिशन की सफलता में योगदान देने के बावजूद उन्हें स्थायी सेवा का लाभ नहीं मिल पाया है।

मुख्यमंत्री धामी ने प्रतिनिधिमंडल की मांगों को गंभीरता से सुनते हुए कहा कि राज्य सरकार संविदा कर्मचारियों के हितों के प्रति पूरी तरह संवेदनशील है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को कर्मचारियों की समस्याओं का व्यावहारिक समाधान निकालने और समायोजन की प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ाने के निर्देश दिए।

बैठक में प्रांतीय संगठन की ओर से प्रदेश महामंत्री सुबोध उनियाल, प्रदेश उपाध्यक्ष हरिप्रसाद लेखवार, सुमन सिंह रोचेला, संजय दत्त सहित कई कर्मचारी नेता मौजूद रहे।

मुख्यमंत्री के आश्वासन के बाद प्रदेशभर में वीबीजी-रामजी और मनरेगा मिशन से जुड़े संविदा कर्मचारियों में खुशी और नई उम्मीद का माहौल है। कर्मचारियों का मानना है कि यदि नियमित पदों का सृजन होता है तो वर्षों से लंबित स्थायीकरण की मांग पूरी होने का रास्ता साफ हो सकता है।

उल्लेखनीय है कि नई व्यवस्था के तहत ग्रामीण परिवारों को रोजगार की अवधि बढ़ाने और रोजगार न मिलने पर जवाबदेही तय करने जैसे प्रावधान लागू किए गए हैं। उत्तराखंड जैसे पर्वतीय और आपदा-संवेदनशील राज्य में इस योजना के लिए केंद्र सरकार 90 प्रतिशत और राज्य सरकार 10 प्रतिशत वित्तीय सहयोग दे रही है। ऐसे में योजना के संचालन में अहम भूमिका निभाने वाले कर्मचारी अब अपने भविष्य को भी सुरक्षित किए जाने की उम्मीद लगाए हुए हैं। मुख्यमंत्री के सकारात्मक रुख से कर्मचारियों को विश्वास है कि सरकार जल्द इस दिशा में ठोस निर्णय ले सकती है।

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