मैनपुरी की सौज झील को मिली रामसर साइट की मान्यता, यूपी में अब 14 अंतरराष्ट्रीय महत्व की आर्द्रभूमियां - Seva Bharat Times

मैनपुरी की सौज झील को मिली रामसर साइट की मान्यता, यूपी में अब 14 अंतरराष्ट्रीय महत्व की आर्द्रभूमियां

सीएम योगी ने बताया प्रदेश के लिए गौरव का क्षण, केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने दी बधाई; जैव विविधता और प्रवासी पक्षियों के संरक्षण को मिलेगी नई पहचान

लखनऊ। उत्तर प्रदेश ने पर्यावरण संरक्षण और जैव विविधता के क्षेत्र में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। मैनपुरी जनपद की किशनी तहसील में स्थित सौज झील को रामसर साइट के रूप में मान्यता मिली है। इस उपलब्धि के साथ उत्तर प्रदेश में रामसर स्थलों की संख्या बढ़कर 14 हो गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसे प्रदेश के लिए गौरव का क्षण बताते हुए प्रदेशवासियों को बधाई दी है। वहीं, केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने भी उत्तर प्रदेश को इस उपलब्धि पर शुभकामनाएं दी हैं।

सीएम योगी बोले—प्राकृतिक विरासत को संरक्षित करने की दिशा में बड़ी उपलब्धि

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि मैनपुरी की सौज झील को प्रतिष्ठित रामसर मान्यता मिलना उत्तर प्रदेश के लिए गर्व का विषय है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में देश की समृद्ध प्राकृतिक विरासत के संरक्षण के प्रयासों को नई गति मिल रही है।

उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि उत्तर प्रदेश की समृद्ध प्राकृतिक धरोहर को दर्शाती है। साथ ही, यह आने वाली पीढ़ियों के लिए प्राकृतिक संसाधनों और जैव विविधता को सुरक्षित रखने के राज्य के संकल्प को भी मजबूत करती है। मुख्यमंत्री ने इस महत्वपूर्ण उपलब्धि पर प्रदेशवासियों को हार्दिक बधाई दी।

96 पक्षी प्रजातियों का आश्रयस्थल है सौज झील

मैनपुरी के प्रभागीय वनाधिकारी शिवम मिश्र के अनुसार, किशनी तहसील में स्थित सौज झील एक महत्वपूर्ण मौसमी आर्द्रभूमि है। कृषि क्षेत्रों से घिरी यह झील समृद्ध जैव विविधता का केंद्र होने के साथ-साथ प्रवासी पक्षियों के लिए भी महत्वपूर्ण आश्रयस्थल है।

झील में अब तक दर्ज प्रमुख जैव विविधता में 96 पक्षी प्रजातियां, 19 मछली प्रजातियां और सात सरीसृप प्रजातियां शामिल हैं। यहां संरक्षण की दृष्टि से महत्वपूर्ण कई प्रजातियां भी पाई जाती हैं। इनमें संकटग्रस्त सारस तथा निकट संकटग्रस्त श्रेणी में शामिल ब्लैक-नेक्ड स्टॉर्क प्रमुख हैं।

विशेषज्ञों की दृष्टि से सौज झील की पारिस्थितिक महत्ता और पक्षियों की विविधता इसे आर्द्रभूमि संरक्षण के लिहाज से महत्वपूर्ण बनाती है। रामसर मान्यता से इस प्राकृतिक धरोहर की पहचान और संरक्षण के प्रयासों को मजबूती मिलने की उम्मीद है।

रामसर स्थलों की संख्या में देश में दूसरे स्थान पर उत्तर प्रदेश

सौज झील को मान्यता मिलने के बाद उत्तर प्रदेश में रामसर स्थलों की संख्या 14 हो गई है। ये स्थल राज्य की प्राकृतिक संपदा, आर्द्रभूमियों और पक्षी विविधता के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

उत्तर प्रदेश के 14 रामसर स्थल

  1. नवाबगंज पक्षी अभयारण्य — उन्नाव
  2. पार्वती अरगा पक्षी अभयारण्य — गोंडा
  3. समान पक्षी अभयारण्य — मैनपुरी
  4. समसपुर पक्षी अभयारण्य — रायबरेली
  5. सरसई नावर झील — इटावा
  6. सांडी पक्षी अभयारण्य — हरदोई
  7. सूर सरोवर पक्षी विहार — आगरा
  8. बखिरा पक्षी अभयारण्य — संत कबीर नगर
  9. ऊपरी गंगा नदी — बृजघाट से नरोरा तक
  10. हैदरपुर वेटलैंड — मुजफ्फरनगर एवं बिजनौर
  11. पटना पक्षी अभयारण्य — एटा
  12. शेखा झील पक्षी अभयारण्य — अलीगढ़
  13. जयप्रकाश नारायण पक्षी अभयारण्य (सुरहा ताल) — बलिया
  14. सौज झील — मैनपुरी

क्या है रामसर साइट का महत्व?

रामसर साइट अंतरराष्ट्रीय महत्व की ऐसी आर्द्रभूमि होती है, जिसे आर्द्रभूमियों के संरक्षण और उनके विवेकपूर्ण उपयोग को बढ़ावा देने वाले अंतरराष्ट्रीय समझौते के तहत मान्यता दी जाती है। ऐसी आर्द्रभूमियां पक्षियों, मछलियों और अन्य जीव-जंतुओं के प्राकृतिक आवास को सुरक्षित रखने में अहम भूमिका निभाती हैं।

सौज झील को मिली यह मान्यता उत्तर प्रदेश के पर्यावरण संरक्षण प्रयासों के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इससे इस क्षेत्र की प्राकृतिक विरासत के प्रति जागरूकता बढ़ाने और जैव विविधता को आने वाली पीढ़ियों के लिए संरक्षित रखने की दिशा में नए अवसर मिल सकते हैं।

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