देहरादून के समग्र विकास के लिए बनेगा नया मॉडल, हर विभाग लाएगा इनोवेटिव प्लान

देहरादून। जनपद देहरादून के समग्र विकास और स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई गति देने के उद्देश्य से जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने वित्तीय वर्ष 2026-27 की जिला योजना को जनहित, नवाचार और स्वरोजगार आधारित बनाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि जिला योजना में ऐसी परियोजनाओं को प्राथमिकता दी जाए जो सीधे आमजन के जीवन स्तर को बेहतर बनाने के साथ-साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूत करें।

जिला योजना संरचना को लेकर आयोजित समीक्षा बैठक में डीएम ने सभी विभागों को कम से कम एक अभिनव एवं स्थायी परियोजना प्रस्तावित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि राजधानी देहरादून की आवश्यकताओं और संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए ऐसी योजनाएं तैयार की जाएं जिनका लाभ धरातल पर दिखाई दे और लोगों को प्रत्यक्ष रूप से मिले।

डीएम ने स्पष्ट किया कि जिला योजना में केवल उन्हीं परियोजनाओं को शामिल किया जाएगा जिनके लिए भूमि उपलब्ध हो, कोई विवाद न हो तथा जिन्हें निर्धारित समय सीमा में पूरा किया जा सके। उन्होंने लंबित एवं अधूरी योजनाओं को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करने के निर्देश देते हुए कहा कि धनराशि उपलब्ध होने के बावजूद कार्यों में देरी को गंभीर लापरवाही माना जाएगा और संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी।

बैठक में स्वरोजगार और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया गया। जिलाधिकारी ने उद्योग, कृषि, उद्यान, पशुपालन, मत्स्य पालन, दुग्ध विकास और आजीविका संवर्धन से जुड़े प्रस्तावों को प्राथमिकता देने को कहा। साथ ही ब्लूबेरी फार्मिंग, ट्राउट मछली उत्पादन, पोल्ट्री फार्मिंग और गन्ना उत्पादन जैसी गतिविधियों को बढ़ावा देने के निर्देश दिए, ताकि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल सके।

शिक्षा विभाग को निर्देश देते हुए डीएम ने कहा कि जनपद का कोई भी विद्यालय बिजली, पेयजल और शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाओं से वंचित नहीं रहना चाहिए। सभी विद्यालयों में आवश्यक सुविधाएं सुनिश्चित की जाएं।

उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने देहरादून जिला योजना के लिए लगभग 99.39 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। इस धनराशि का उपयोग जनहित और विकास कार्यों में प्रभावी ढंग से किया जाना चाहिए, ताकि इसका लाभ इसी वित्तीय वर्ष में जनता तक पहुंच सके।

मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह ने विभिन्न विभागों द्वारा प्रस्तुत प्रस्तावों की जानकारी दी। वहीं जिला अर्थ एवं संख्या अधिकारी ने बताया कि कुल स्वीकृत परिव्यय में 37.19 करोड़ रुपये मानदेय एवं वचनबद्ध योजनाओं, 10.39 करोड़ रुपये अधूरे कार्यों को पूरा करने, 15.93 करोड़ रुपये स्वरोजगार योजनाओं तथा 36.25 करोड़ रुपये नए एवं अभिनव कार्यों के लिए निर्धारित किए गए हैं।

बैठक के अंत में जिलाधिकारी ने चेतावनी दी कि जिला योजना के अंतर्गत स्वीकृत कार्यों का भौतिक सत्यापन कराया जाएगा। यदि किसी विभाग द्वारा जनहित के अनुरूप धनराशि का उपयोग नहीं पाया गया तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

मुख्य बिंदु

  • जिला योजना में शामिल होंगी नवाचार आधारित परियोजनाएं।
  • हर विभाग को देनी होगी कम से कम एक अभिनव योजना।
  • ब्लूबेरी, ट्राउट, पोल्ट्री और कृषि आधारित रोजगार योजनाओं पर फोकस।
  • अधूरी परियोजनाओं को समयबद्ध तरीके से पूरा करने के निर्देश।
  • 99.39 करोड़ रुपये की जिला योजना से विकास कार्यों को मिलेगी रफ्तार।
  • कार्यों का होगा भौतिक सत्यापन, लापरवाही पर होगी कार्रवाई।

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