देहरादून। लोक भवन में बुधवार को हेमवती नंदन बहुगुणा उत्तराखण्ड चिकित्सा शिक्षा विश्वविद्यालय की ओर से ‘एकीकृत चिकित्सा संगोष्ठी’ का आयोजन किया गया। संगोष्ठी में देश-विदेश के चिकित्सा विशेषज्ञों, शिक्षाविदों और विभिन्न चिकित्सा पद्धतियों से जुड़े विशेषज्ञों ने प्रतिभाग कर आधुनिक चिकित्सा और पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों के बीच बेहतर समन्वय की संभावनाओं पर मंथन किया।
कार्यक्रम में महर्षि इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी, अमेरिका के प्रोफेसर एवं चेयर, डिपार्टमेंट ऑफ इंटीग्रेटिव मेडिसिन डॉ. चार्ल्स एल्डर तथा अमेरिकन एसोसिएशन ऑफ फिजिशियंस ऑफ इंडियन ओरिजिन के डॉ. अमित शाह ने भी अपने विचार रखे।
संगोष्ठी के दौरान ‘इंटीग्रेटिव मेडिसिन’ विषय पर पैनल चर्चा आयोजित की गई। इसमें भारत सरकार के आयुष मंत्रालय के सचिव वैद्य राजेश कोटेचा, पद्मश्री डॉ. एस.सी. मनचंदा, पूर्व राज्यसभा सांसद तरुण विजय, नेशनल कमीशन फॉर इंडियन सिस्टम ऑफ मेडिसिन की चेयरपर्सन डॉ. मनीषा कोठेकर तथा एचएनबी उत्तराखण्ड चिकित्सा शिक्षा विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. (डॉ.) भानु दुग्गल ने सहभागिता की।
आयुष, आईसीएमआर और विश्वविद्यालय के बीच हुआ एमओयू
कार्यक्रम का महत्वपूर्ण आकर्षण आयुष, आईसीएमआर-एनआईआरडीएच और हेमवती नंदन बहुगुणा उत्तराखण्ड चिकित्सा शिक्षा विश्वविद्यालय के बीच हुआ समझौता ज्ञापन (एमओयू) रहा। इसके माध्यम से आयुष को आधुनिक चिकित्सा एवं राष्ट्रीय स्वास्थ्य पहलों से जोड़ने, डिजिटल स्वास्थ्य के क्षेत्र में प्रशिक्षण एवं क्षमता निर्माण को बढ़ावा देने तथा एआई और दूरस्थ निगरानी जैसी तकनीकों के माध्यम से अनुसंधान एवं नवाचार को गति देने का लक्ष्य रखा गया है।
‘प्रतिस्पर्धा नहीं, सामूहिक शक्ति का उपयोग है एकीकृत चिकित्सा’
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि) ने कहा कि एकीकृत चिकित्सा किसी एक चिकित्सा पद्धति की दूसरी पद्धति से प्रतिस्पर्धा नहीं है। इसका उद्देश्य विभिन्न चिकित्सा प्रणालियों की सामूहिक शक्ति का उपयोग करते हुए रोगी और संपूर्ण मानवता को बेहतर स्वास्थ्य उपलब्ध कराना है।
उन्होंने कहा कि विश्व स्तर पर एकीकृत चिकित्सा को लेकर नई सोच और जागरूकता विकसित हो रही है। ऐसे में भारत और उत्तराखण्ड को इस क्षेत्र में महत्वपूर्ण नेतृत्वकारी भूमिका निभानी होगी।
राज्यपाल ने आयुष मंत्रालय, भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद और एचएनबी उत्तराखण्ड चिकित्सा शिक्षा विश्वविद्यालय के बीच हुए एमओयू को महत्वपूर्ण कदम बताते हुए कहा कि इससे शोध, नवाचार, शिक्षा और चिकित्सा के क्षेत्र में नई उपलब्धियों के रास्ते खुलेंगे।
उन्होंने कहा कि यह आयोजन केवल एक संगोष्ठी नहीं, बल्कि चिकित्सा के विभिन्न दृष्टिकोणों को एक साझा मंच पर लाकर मानव कल्याण के लिए नई दिशा तय करने की पहल है। उन्होंने विश्वास जताया कि इस पहल के दूरगामी सकारात्मक परिणाम सामने आएंगे और इसका लाभ भारत के साथ-साथ पूरी मानवता को मिलेगा।
उत्तराखंड में बनेगा एकीकृत चिकित्सा का सेंटर ऑफ एक्सीलेंस?
केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों और आधुनिक विज्ञान के बीच बेहतर समन्वय पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि आयुष मंत्रालय राज्य सरकार के साथ मिलकर इस दिशा में कार्य करेगा।
उन्होंने स्वास्थ्य सेवाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए नवाचार, नई तकनीक, टेलीमेडिसिन और मोबाइल आयुष इकाइयों के व्यापक उपयोग की आवश्यकता बताई। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि एकीकृत चिकित्सा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए आयुष मंत्रालय, राज्य सरकार, विश्वविद्यालयों, मेडिकल कॉलेजों और अनुसंधान संस्थानों के बीच मजबूत सहयोग जरूरी है।
उन्होंने एलोपैथी, आयुर्वेद और अन्य चिकित्सा पद्धतियों के विशेषज्ञों से रोगी के बेहतर स्वास्थ्य को केंद्र में रखते हुए संयुक्त अनुसंधान, प्रशिक्षण और शैक्षणिक कार्यक्रमों को बढ़ावा देने का आह्वान किया।
केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री ने एचएनबी उत्तराखण्ड चिकित्सा शिक्षा विश्वविद्यालय से राज्य में एकीकृत चिकित्सा का पहला ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ स्थापित करने की दिशा में पहल करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि इस महत्वपूर्ण पहल के लिए केंद्र सरकार विश्वविद्यालय और राज्य सरकार को पूरा सहयोग प्रदान करेगी।
कार्यक्रम में चिकित्सा स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री सुबोध उनियाल, योग गुरु स्वामी रामदेव, विधायक दुर्गेश्वर लाल, सचिव राज्यपाल रविनाथ रामन, सचिव रंजना राजगुरु, अपर सचिव रीना जोशी, अपर सचिव विजय कुमार जोगदण्डे, कुलपति आयुर्वेद विश्वविद्यालय डॉ. अरुण कुमार त्रिपाठी सहित विभिन्न मेडिकल कॉलेजों के छात्र-छात्राएं एवं चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञ उपस्थित रहे।
मुख्य बिंदु:
- विभिन्न चिकित्सा पद्धतियों के बीच समन्वय पर जोर
- आयुष, आईसीएमआर और विश्वविद्यालय के बीच एमओयू
- डिजिटल हेल्थ, एआई और रिमोट मॉनिटरिंग पर अनुसंधान को बढ़ावा
- उत्तराखंड में एकीकृत चिकित्सा के पहले सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की पहल
- टेलीमेडिसिन और मोबाइल आयुष इकाइयों के विस्तार पर जोर