नारी सम्मान” विशेष सत्र से पहले हाई-अलर्ट, विधानसभा में सुरक्षा तैयारियों की बड़ी समीक्षा

???? देहरादून से बड़ी खबर

???? देहरादून | 26 अप्रैल 2026 उत्तराखंड की पंचम विधानसभा के अंतर्गत 28 अप्रैल को आयोजित होने जा रहे एक दिवसीय विशेष सत्र “नारी सम्मान – लोकतंत्र में अधिकार” को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। इसी क्रम में आज देहरादून स्थित विधानसभा भवन में एक उच्च स्तरीय सुरक्षा बैठक आयोजित की गई, जिसकी अध्यक्षता विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खण्डूडी भूषण ने की।

???? सुरक्षा से लेकर ट्रैफिक तक हर पहलू पर मंथन

बैठक में विशेष सत्र को सुरक्षित, सुव्यवस्थित और सफल बनाने के लिए व्यापक रणनीति तैयार की गई। इस दौरान निम्न व्यवस्थाओं पर विस्तार से चर्चा हुई:

  • कानून-व्यवस्था और सुरक्षा प्रबंधन
  • वीआईपी एवं आगंतुकों की आवाजाही
  • यातायात और पार्किंग व्यवस्था
  • फायर सेफ्टी और स्वास्थ्य सेवाएं
  • पेयजल, स्वच्छता और बिजली आपूर्ति
  • संचार तंत्र और मीडिया प्रबंधन

विधानसभा अध्यक्ष ने स्पष्ट निर्देश दिए कि किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी और सभी तैयारियां समयबद्ध तरीके से पूरी की जाएं।

???? “समन्वय ही सफलता की कुंजी”

ऋतु खण्डूडी भूषण ने सभी विभागों को आपसी तालमेल के साथ काम करने पर जोर देते हुए कहा कि
???? “सभी व्यवस्थाएं सुचारु और व्यवस्थित रहें, इसके लिए विभागीय समन्वय बेहद जरूरी है।”

उन्होंने यह भी भरोसा जताया कि सभी विभागों के सहयोग से यह विशेष सत्र गरिमामय और सफलतापूर्वक संपन्न होगा।

 वरिष्ठ अधिकारी रहे मौजूद

बैठक में शासन, पुलिस प्रशासन और विभिन्न विभागों के कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। इनमें मुख्य रूप से शामिल रहे:

  • मुख्य सचिव आनन्द वर्धन
  • पुलिस महानिदेशक दीपम सेठ
  • सचिव गृह शैलेश बगोली
  • एडीजी लॉ एंड ऑर्डर वी. मुरुगेशन
  • आईजी गढ़वाल राजीव स्वरूप
  • एसएसपी देहरादून पी. एस. डोभाल
  • सीएमओ डॉ. मनोज कुमार शर्मा
  • एडीएम देहरादून कृष्ण कुमार मिश्रा
  • आईटीबीपी, जल संस्थान, पीडब्ल्यूडी, आईटी एवं अन्य विभागों के अधिकारी

विधानसभा सचिवालय से भी प्रभारी सचिव और मार्शल सहित संबंधित अधिकारी बैठक में शामिल हुए।

???? क्या है खास?

???? यह विशेष सत्र “नारी सम्मान – लोकतंत्र में अधिकार” विषय पर केंद्रित है, जो महिला सशक्तिकरण और लोकतांत्रिक भागीदारी को लेकर अहम माना जा रहा है।

???? निष्कर्ष:
देहरादून में होने जा रहा यह विशेष सत्र न केवल राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि महिला अधिकारों को लेकर भी एक बड़ा संदेश देने की तैयारी में है—और प्रशासन इसे लेकर पूरी तरह अलर्ट मोड में नजर आ रहा है।

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